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विद्युत मोटर का सिद्धांत बनावट तथा क्रियाविधि | Vidyut Motor ka Siddhant, Banawat Tatha Kriyavidhi

विद्युत मोटर का सिद्धांत बनावट तथा क्रियाविधि :-


हैलो दोस्तों मैं आपका स्वागत करता हूँ, हमारे इस ब्लॉग में, इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम मैं आपको विद्युत मोटर क्या हैं। विद्युत मोटर का सिद्धांत, बनावट तथा क्रियाविधि के बारे में पूरी जानकारी दूंगा।

विद्युत मोटर क्या है ?

विद्युत मोटर एक ऐसा यंत्र है जो विद्युत उर्जा को यांत्रिक उर्जा में परिवर्तित करने का काम करता है। 

विद्युत मोटर का सिद्धांत क्या  है ?

विद्युत मोटर विद्युत धारा के चुम्बकीय सिद्धांत पर काम करता है। 

विद्युत मोटर की संरचना कैसा रहता है ?

विद्युत मोटर की संरचना निम्नलिखित भागों से मिलकर बना रहता है।

मोटर का बॉडी मोटर का वह भाग जो मोटर में लगे सभी स्थिर तथा अस्थिर भागों को सहारा देने का काम करता है मोटर का बॉडी कहलाता है। यह प्रायः कास्ट आयरन स्टील या हाई कार्बन स्टील का बना होता है। 

क्षेत्र चुम्बक →  किसी भी विद्युत मोटर के अंदर दो समान शक्तिशाली  स्थायी चुंबक एक दूसरे के विपरीत दिशा स्थित रहते है जिसे क्षेत्र चुंबक कहते है। 

आर्मेचर →  विद्युत मोटर में नरम लोहे पर तांबे की विद्युत रोधी तार के अनेक फेरों से बना हुआ एक  आयताकार ABCD कुंडली होता है जिसे आर्मेचर कहते है यह कुंडली चुंबकीय क्षेत्र के धुर्वो के बीच इस प्रकार स्थित रहता है कि चुंबकीय क्षेत्र कुंडली के लंबवत हो।  

 विभक्त वलय→ आर्मेचर के अंतिम छोर पर चालक का दो अर्धगोला होता है जिसे विभक्त वलय कहते है। इसका आंतरिक भाग विद्युत का कुचालक होता है जो धुरी से जुड़ा रहता है। इस विभक्त वलय से कुंडली का तार जुड़ा हुआ रहता है। 

ब्रुश →  विभक्त वालयों के ऊपरी भाग पर दो स्थिर चालक X तथा Y स्पर्श करते  है जिसे ब्रुश कहते है यह  मोटर के कुंडली के घूमने पर भी स्थिर रहता है।  इन दोनों ब्रुशों X तथा Y से बैटरी के तार जुड़े हुए रहते हैं। 


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Electric Motor


विद्युत मोटर की क्रियाविधि क्या है ?

जब विद्युत मोटर के X ब्रुश को बैटरी के धन टर्मिनल से तथा Y ब्रुश को ऋण टर्मिनल से जोड़ा जाता है तब धारा का प्रवाह X ब्रुश से होते हुए कुंडली ABCD की ओर बहने लगता है तथा ब्रुश Y में प्रवेश करता है इस स्थिति में कुंडली की भुजा AB में धारा A से B की ओर बहने लगता है तथा भुजा CD में धारा C से D की ओर बहने लगता है फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से कुंडली AB पर विद्युत क्षेत्र के कारण ऊपर की ओर बल लगता है जबकि कुंडली CD पर नीचे की ओर बल लगता है जिसके कारण स्वतंत्र कुंडली अपने अक्ष पर एक निश्चित दिशा में घूमने लगते हैं आधे चक्कर के बाद बैटरी का धन टर्मिनल Y ब्रुश के साथ जुड़ जाता है तथा बैटरी का ऋण टर्मिनल X ब्रुश से जुड़ जाता है जिससे धारा का प्रवाह कुंडली में DCBA की ओर होने लगता है इस स्थिति में भुजा CD में धारा का  प्रवाह D से C की ओर होने लगता है जबकी भुजा AB में धारा का प्रवाह B से A की ओर होने लगता है फ्लेमिंग के वामहस्त नियम से चुंबकीय क्षेत्र के कारण भुजा CD पर लगने वाला बल ऊपर की ओर होता है जबकि भुजा AB पर लगने वाला बल नीचे की ओर होता है जिससे स्वतंत्र कुंडली अपने अक्ष पर  फिर से आधा चक्कर पूर्ण करती है इस प्रकार कुंडली एक चक्कर पूर्ण करती है यह क्रिया लगातार चलती रहती है और मोटर हमेशा अपने अक्ष पर एक निश्चित दिशा में घूमता रहता है।

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धन्यवाद !
विद्युत मोटर का सिद्धांत बनावट तथा क्रियाविधि | Vidyut Motor ka Siddhant, Banawat Tatha Kriyavidhi विद्युत मोटर का सिद्धांत बनावट तथा क्रियाविधि | Vidyut Motor ka Siddhant, Banawat Tatha Kriyavidhi Reviewed by Dilgitshop on September 02, 2019 Rating: 5

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